Sunday 09 Aug 2026 14:06 PM

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तलाक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक अहम टिप्पणी "'वैवाहिक संबंधों को लेकर झूठी शिकायत करना क्रूरता है"

'वैवाहिक संबंधों को लेकर झूठी शिकायत करना क्रूरता है',

   प्रयागराज. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी में कहा है कि अगर पति-पत्नी रिश्ते में नाखुश हैं तो उन्हें साथ रहने के लिए मजबूर करना क्रूरता होगी. लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी  को एक साथ लाने की बजाय तलाक लेना ज्यादा हित में है।

इस वक्तव्य  के साथ कोर्ट ने अपर मुख्य न्यायाधीश परिवार न्यायालय गाजियाबाद के पति की ओर से दायर तलाक की अर्जी खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है और दोनों के बीच विवाह विच्छेद कर दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह एवं न्यायमूर्ति एकेएस देशवाल की खंडपीठ ने अशोक झा की प्रथम अपील को स्वीकार करते हुए दिया है.

कोर्ट ने पति को स्थायी तलाक के बदले पत्नी को तीन महीने में 1 करोड़ रुपये देने का भी निर्देश दिया है। पति सालाना 2 करोड़ रुपए इनकम टैक्स भरते हैं। कोर्ट ने कहा, आदेश का पालन नहीं किया तो छह फीसदी ब्याज देना होगा.

कोर्ट ने कहा, पुलिस ने दहेज उत्पीड़न मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की. याचिकाकर्ता को कोर्ट ने बरी कर दिया. दोनों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए हैं. हालात यहां तक पहुंच गए कि समझौते की गुंजाइश ही खत्म हो गई. झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि झूठे मामले में फंसाया जाना क्रूरता है.

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