दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए बड़े प्रदर्शन और हजारों लोगों की हिरासत पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने चिंता जताई है। उसने इसे "मनमानी कार्रवाई" बताते हुए भारत सरकार से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की अपील की।
भारत ने इस टिप्पणी को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि यह अनावश्यक हस्तक्षेप है और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है, लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के अधीन है। विदेश मंत्रालय ने UN पर दोहरी मानदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि पुलिस व प्रशासन ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 2,000 से 7,000 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें विपक्षी नेता, वकील, पत्रकार और नागरिक समाज के सदस्य शामिल थे। सुरक्षा के मद्देनज़र 30,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए।
🇮🇳 भारत का रुख
लोकतंत्र में शांतिपूर्ण सभा का अधिकार है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था के अधीन है।
पुलिस और प्रशासन ने कानून के अनुसार कार्रवाई की।
UN की टिप्पणी को भारत ने "चयनात्मक" और "दोहरी मानदंड" बताया।
🌍 UN का रुख
बड़े पैमाने पर हिरासत पर चिंता जताई।
इसे "मनमानी कार्रवाई" कहा।
भारत सरकार से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की अपील की।
⚠️ असर
भारत और UN के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में पेश कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत ने स्पष्ट किया कि बाहरी संस्थाओं का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
Comments